Saturday, 23 November 2013

Kumar Vishwas Poetry


अपने लफ़्ज़ों से चुकाया है किराया इसका,
दिलों के दरमियां यूँ मुफ्त में नहीं रहती,
साल दर साल मै ही उम्र न देता इसको,
तो ज़माने में मोहब्बत जवां नहीं रहती…
Dr. Kumar Vishwas

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