Saturday, 11 January 2014

शायरी एस एम एस


हटालो अपने चहेरे से झुल्फे . .
हो जायेगी जरुर सुबहा ऐक दिन . .
यु न फैलाओ सरे आम बदन की खुश्बू . .
वरना हो जायेगा ये फुल भी रुसवा ऐक दिन . . . .

No comments:

Post a Comment

Note: only a member of this blog may post a comment.